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  1. 1

    COPIED FROM SALEEM BAIG POST

    दंगो के मुकाबले लींचिंग एक ज़्यादा सफ़ल प्रयोग साबित हो रहा है जो कम नुक़सान मे ज़्यादा वोट दिलायेगा,
    1- दंगो मे बाज़ार बंद होने या कर्फ़यू की वजह से उनके वोटर के कारोबार का नुक़सान होता है जबकि लींचिंग मे ऐसा कुछ नुक़सान नही
    2- दंगो मे अतिरिक्त फ़ोर्स लगानी पड़ती है जिस पर सरकार का भी पैसा ख़र्च होता है जबकि लींचिंग मे ऐसा कुछ नही
    3- दंगे आन रिकार्ड शासन प्रशासन की विफ़लता मानी जाती है जबकि लींचिंग को रोडरेज, गौतस्करी , बच्चा चोरी जैसे अपराधों मे परिवर्तित करके सामान्य अपराध दिखाया जाता है
    4- दंगो को मीडिया कवरेज ज़्यादा मिलता है जिसकी वजह से बात विदेशों तक पहुंच जाती है और ज़्यादा बदनामी होती है लींचिंग फिर भी इतना कवरेज नही ले पाती
    5- दंगो मे आम माहौल झगड़े का होता है जिसमे दूसरा पक्ष भी नुक़सान पहुंचा सकता है जबकि लींचिंग मे एक दो लोगों को सैंकड़ों लोग घेरकर मारते हैं जिसमे दूसरा पक्ष कोई नुक़सान पहुंचा ही नही सकता
    6- दंगे मे भले ही एक पक्ष का नुक़सान ज़्यादा हो फिर भी दंगा बराबरी का शब्द है जिससे कमज़ोर पक्ष पर अत्याचार ज़्यादा महसूस नही होता जबकि लिंचिंग मे अत्याचार होता दिखता है वही चीज़ साम्प्रदायिक बहुसंख्यको को ज़्यादा ख़ुश करती है, इसी उम्मीद पर वोट दिया था इसी से ख़ुश होकर फिर देंगे
    Saleem Beig

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